राजेश बैरागी।हम पांचवीं अर्थव्यवस्था तो बन ही चुके हैं जैसा कि हमें बताया जा रहा है और तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। विकसित भारत का सपना देखते हुए हमारी नींद खुलने का नाम नहीं ले रही है।हम पड़ोसी राष्ट्र के सुदूर एयरबेसों को यहीं बैठे बैठे मिसाइलों से तबाह कर डालते हैं। ऑपरेशन सिंदूर हमारे पराक्रम का ही परिचय नहीं देता है बल्कि हमारी प्रोद्योगिकी का भी लोहा मनवाता है।परंतु उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा नगर के सेक्टर 150 में अकाल मृत्यु के शिकार हुआ आईटी इंजीनियर युवराज भाग्यहीन था।उसे अपने देश को तीसरी अर्थव्यवस्था और विकसित होने का तमगा देखना नसीब नहीं हुआ।वह एक भूखंड में भरे पानी में अपनी कार सहित जा गिरा।उसे या तो कार चलाना नहीं आता होगा या भूखंड विकसित भारत का लिहाज छोड़कर उसकी कार के आगे आ गया होगा।वह गुरुग्राम से लौट रहा था। यह वही गुरुग्राम है जहां पिछली बारिश में इतना जलभराव हो गया था कि वहां के निवासी कार छोड़कर नाव खरीदने पर विचार करने लगे थे। युवराज वहां भी नहीं डूबा। बाहर जाकर आदमी सतर्क हो जाता है, अपने इलाके में आकर बेफिक्र हो जाता है।उसे अपने इलाके की व्यवस्थाओं, पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ पर अटूट भरोसा रहता है। यही भरोसा उसे डूबने पर मजबूर कर देता है। यदि उसे इस हाईटेक शहर की दमकल, पुलिस, प्राधिकरण, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ पर भरोसा न होता तो वह हाथ पैर मारकर उस भूखंड की जलप्रलय से संभवतः पार पा लेता। क्या अर्थव्यवस्थाओं की सीढ़ियों पर उछल उछलकर चढ़ना कुछ अमीरों के खजानों को भरने का नाम है? मात्र 27 वर्ष की अल्पायु में नगरीय व्यवस्थाओं पर बिना चाहे शहीद हो गया युवराज तीसरी अर्थव्यवस्था बनने को आतुर देश से संभवतः यही प्रश्न पूछ रहा होगा।अब पुलिस जांच करेगी और प्राधिकरण अपने एक दो अभियंताओं को शाय़द निलंबित भी कर दे परंतु एक दर्जन से अधिक आईएएस और कमिश्नरेट पुलिस वाले इस शो विंडो शहर में झांकना खतरे से खाली तो नहीं है।
हम उस देश में रहते हैं ………..?









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