राजेश बैरागी।देश के अन्य पीजीआई तथा आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की तर्ज पर विकसित हो रहे ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) की विशाल इमारत के नीचे बेसमेंट में अनवरत पानी रिसाव की समस्या से निपटने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक बार फिर प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए विशेषज्ञ संस्थाओं से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल आमंत्रित किए गए हैं।
ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान को बेसमेंट में पानी रिसने की गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने विशेषज्ञ संस्थाओं से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल आमंत्रित किया है। इच्छुक संस्थाएं आगामी 27 जनवरी तक इस हेतु उत्तर प्रदेश सरकार के ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल अथवा प्राधिकरण की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं।दरअसल निर्माण के समय से ही यह संस्थान बेसमेंट में अनवरत रिस रहे पानी की समस्या से जूझ रहा है। यह समस्या रुड़की आईआईटी समेत इंजीनियरों के लिए एक चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के चलते जिम्स के मौजूदा भवन के ऊपर और निर्माण भी नहीं किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती द्वारा विशेष रुचि लेकर बनवाए गए इस संस्थान को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक उच्च चिकित्सा सुविधा वाले संस्थान के तौर पर विकसित कर रही है। वर्तमान में इस संस्थान में दो दर्जन से अधिक चिकित्सा विभाग कार्य कर रहे हैं। सामान्य सर्जरी, हड्डी रोग, प्रसूति एवं महिला चिकित्सा,बाल रोग, सामान्य मेडिसिन आदि विभागों में उपचार के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग इस संस्थान में पहुंचते हैं। निदेशक ब्रिगेडियर डॉ राकेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में इस संस्थान को अमूमन प्रति सप्ताह एक नयी सुविधा या उपलब्धि हासिल हो रही है। भविष्य में इसे राज्य पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल इंस्टीट्यूट के तौर पर विकसित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा आठ सौ करोड़ रुपए का बजट तैयार किया गया है जिसमें से दो सौ करोड़ रुपए आवंटित भी कर दिए गए हैं
जिम्स ग्रेटर नोएडा: बेसमेंट में पानी रिसाव रोकने की कवायद फिर से









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