शहर शहर तीस बरस पुरानी सीवर और पेयजल लाइनों का सहमति संबंध और इंदौर दूषित जल कांड

राजेश बैरागी।क्या देश के महानगरों के निवासी जानते हैं कि वे नियमित और अनिवार्य रूप से बिना शोधित सीवर का पानी दैनिक कार्यों में उपयोग करने से लेकर पीते भी हैं? एक और प्रासंगिक प्रश्न यह है कि क्या इंदौर दूषित पानी कांड देश के अन्य स्थानीय निकायों के लिए अपनी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का परीक्षण करने का आदर्श मामला बन गया है?
मैंने एक वरिष्ठ अभियंता के सुझाव पर केंद्रिय सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन(सीएचपीईईओ) की दिग्दर्शिका(मेन्युअल) का सरसरी तौर पर अध्ययन किया। उसमें उल्लिखित है कि सीवर और पेयजल की लाइनें तीस वर्ष की आयु ही जी पाती हैं। उसके बाद?तीस वर्ष बीतने पर सरकारी सेवकों की भांति ये लाइनें अगले दिन पूरी तरह रिटायर तो नहीं हो जाती हैं परंतु उनका घेरा तीस वर्ष बीतते बीतते इतना कमजोर हो जाता है कि उसमें बहने वाला सीवर या पेयजल बाहर रिसने लगता है। चूंकि सभी नगरों में सीवर और पेयजल लाइनें आमतौर पर साथ साथ चलती हैं, इसलिए सीवर लाइनों से रिसने वाला गंदा दूषित जल पेयजल लाइनों में घुसता रहता है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पेयजल आपूर्ति के निर्धारित समय के पहले और बाद में मोटर पंप से पानी न खींचने की एडवाइजरी जारी की है। नोएडा के सेक्टर 27 की आफिसर कॉलोनी में रहने वाले नोएडा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी उनके निवास पर प्राधिकरण की लाइन से आने वाले पेयजल से आतंकित रहते हैं। निजी बातचीत में उन्होंने बताया कि किसी भी दिन पेयजल लाइन से काले रंग का पानी आ जाता है।11 वर्ष पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए बिछाई गई गंगाजल पाइप लाइन अनगिनत स्थानों से गल गयी है।इसे दुरुस्त और साफ करने का काम एक वर्ष से अधिक समय से चल रहा है। एक हजार करोड़ की यह महत्वाकांक्षी परियोजना विभिन्न कारणों से आज तक चालू नहीं हो पाई है। दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रतिदिन सवेरे घरों की टोंटी से गंदा बदबूदार पेयजल आने की शिकायत आम है। ठेकेदारों और विभागों की सांठगांठ से अधोमानक सामग्री से बने पाइपों से सीवर और पेयजल लाइनों का बेहद लापरवाही से बिछाए जाने के बाद स्थापित मानदंडों को दरकिनार कर आयु बीत जाने के बाद भी उनका उपयोग जारी रखना एक आम बात है। क्या हम सीवर के दूषित पानी पीने के आदी हो चुके हैं?सक्षम लोगों के कुत्तों को भी आर ओ और मिनरल वाटर मिल रहा है तो अक्षम लोगों की कौन परवाह करता है। इंदौर का दूषित जल कांड तीस बरस पुरानी सीवर और पेयजल लाइनों की परस्पर जुगलबंदी का ही परिणाम है।उस कांड के बाद सभी प्राधिकरण, नगर निगम और स्थानीय निकाय पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हो उठे हैं। खुद और नामी प्रयोगशालाओं से सुबह दोपहर शाम आपूर्ति किए जा रहे पेयजल के सैंपल लिए जा रहे हैं। मामला ठंडा होने पर चिंताएं भी ठंडी पड़ जाएंगी। परंतु तीस बरस पुरानी सीवर और पेयजल लाइनें अपनी जर्जर देह को थामे नगरों के सीवर को ढोने और कथित पेयजल की आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाती रहेंगी। यह और बात है कि सीवर का दूषित जल पेयजल के साथ सहमति संबंध में बना रहेगा

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