-राजेश बैरागी।स्वच्छ भारत अभियान में निरंतर प्रथम श्रेणी शहर बने रहने की पहली शर्त क्या है? नोएडा शहर भी पिछले तीन चार वर्षों से इस अभियान का सक्रिय भागीदार है और किसी न किसी श्रेणी में पुरस्कार ले ही आता है। शहरों को स्वच्छ बनाए रखने के लिए उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होना अच्छी बात है। इससे कम से कम सरकारी तंत्र तो थोड़ा बहुत सतर्क सजग रहता ही है। हालांकि जनभागीदारी के अभाव में ऐसे किसी भी आयोजन की सफलता असंभव रहती है। नंबर वन होने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य तत्व है परंतु नोएडा में यह कहीं भी दिखाई नहीं देती है। इंदौर के संबंध में मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि वहां के नागरिक स्वप्रेरणा या नगर निगम की प्रेरणा से अपने शहर को प्रथम श्रेणी में बनाए रखने की सीमा तक स्वच्छता अभियान में भागीदारी निभाते हैं। तो फिर स्वच्छ भारत अभियान में हर बार प्रथम स्थान प्राप्त करने का वास्तविक तरीका क्या है? एक पत्रकार मित्र दावा करते हैं कि नोएडा को स्वच्छ भारत अभियान में मिल रहे पुरस्कार निशुल्क नहीं हैं। क्या इंदौर नगर को प्रथम श्रेणी पुरस्कार के लिए भी कोई भुगतान करना होता है?दंत कथाओं का अस्तित्व तो होता है परंतु प्रमाणित नहीं होता।मेरे पास दोनों ही शहरों को मिलने वाले पुरस्कारों के निशुल्क अथवा सशुल्क होने का कोई प्रमाण नहीं है। परंतु स्वच्छता अभियान में पिछले कई वर्षों से प्रथम आ रहे इंदौर शहर में विषैले पेयजल से दर्जनों लोगों की जान जाने और सैकड़ों लोगों की जान पर संकट आने का प्रमाण पूरे देश के सामने है। स्वच्छता पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति शीर्ष शर्तों में से एक होती है।क्या इंदौर शहर को निरंतर प्रथम श्रेणी का पुरस्कार मिलने की जांच करने की आवश्यकता है?मेरे विचार से उन एजेंसियों की जांच करने की आवश्यकता है जो पुरस्कार देती हैं।(
नंबर एक शहर होने का सच









Leave a Reply