नववर्ष 2026 को लेकर मेरी भविष्यवाणियां

राजेश बैरागी।भविष्यवाणी करना कोई रॉकेट साइंस नहीं रहा है।सटीक भविष्यवाणी करना अनिवार्य नहीं है और संभावित भविष्यवाणी का कोई भविष्य हो ही, यह आवश्यक नहीं होता। लफ़्ज़ों की बाजीगरी से भविष्य की संभावनाओं और आशंकाओं की ऐसी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं जिनके बारे में कम से कम तब तक तो चर्चा चलती रह सकती है जब तक कि वह दिन न बीत जाए जिस दिन के लिए वह भविष्यवाणी की गई है। तो साहिबान कद्रदान हाजिर है नये साल का भविष्यफल।सटीक बैठे तो मुझे कोई फीस देने की जरूरत नहीं और निष्फल रहे तो गारंटी वसूलने के लिए मेरे पास आना नहीं है।2026 में सबसे बड़ी और अहम् भविष्यवाणी देश के प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के बने रहने की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी कुर्सी से हिलने वाले नहीं हैं हालांकि उन्हें हिलाने के लिए भूकंप का आना जाना लगा रहेगा। ऐसे भूकंपों का केंद्र दिल्ली की भूमि के ऊपर रहेगा। राजनीतिक भूकंपों का केंद्र धरती के नीचे नहीं ऊपर होता है। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की उथल-पुथल का असर ममता बनर्जी की पुनः जीत पर भारी पड़ सकता है हालांकि भाजपा केवल बांग्लादेश के भरोसे बंगाल चुनाव में जीतने का भ्रम नहीं पालेगी। बिहार में नीतीश कुमार 2026 में भी मुख्यमंत्री बने रहेंगे परंतु केंद्र में मजबूती मिलते ही भाजपा उनके नकाब को उतारने की कोशिश कर सकती है। तमिलनाडु में स्टालिन को बहुत खतरा तो नहीं है परंतु हारने का जोखिम कोई भी नहीं उठाना चाहेगा। पाकिस्तान के साथ संबंध सिंदूरी रहने के ही आसार हैं। अमेरिका टैरिफ को लेकर अड़ा रह सकता है हालांकि साल बीतते बीतते उसे अपने टैरिफ को लेकर अफसोस भी हो सकता है। रुपया इस वर्ष भी बीते साल का अनुसरण करता रहेगा और डॉलर के समक्ष पानी भरता रहेगा। पुलिस की कार्रवाइयों को लेकर संदेह जारी रहेगा फिर भी चोर बदमाशों को पकड़ने से लेकर सांप पकड़ने तक पुलिस पर भरोसा करने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। मीडिया की कमर और झुक सकती है। इस वर्ष पैदा होने वाली मीडिया नस्लें शर्तिया कुबड़ी होंगी। इससे उन्हें कमर झुकाने के पाप से मुक्ति मिलती रहेगी। अदालतें इंसाफ का हथौड़ा पीटती रहेंगी परंतु उनकी सत्यनिष्ठा आलोचना के दायरे में रहेगी। बच्चों से लेकर बूढ़े तक मोबाइल और सोशल मीडिया की चपेट में रहेंगे, युवाओं के लिए क्या ही कहा जा सकता है। भविष्यवाणी तो और भी हैं परंतु साल के बीच में पूरक और अनुपूरक भविष्यवाणियों के लिए भी गुंजाइश बची रहे,यही उचित है।

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