जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर बार चुनाव:मनोज भाटी बोड़ाकी के सिर सजा जीत का ताज, क्या हैं इस परिणाम के मायने

राजेश बैरागी।जब मैं यह पोस्ट लिख रहा हूं गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन के सात पदों पर हुए वार्षिक चुनाव की मतगणना जारी है और अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ है परंतु एकतरफा जीत हासिल करते हुए मनोज भाटी बोड़ाकी के सिर पर अध्यक्ष का ताज सजना तय हो गया है। उनके सामने योगेन्द्र भाटी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। मनोज भाटी की जीत चौंकाने वाली है। उनके समर्थकों ने अंतिम समय तक चुप्पी साधे रखी और बेमौसमी बयार योगेन्द्र भाटी के पक्ष में बहती रही। योगेन्द्र भाटी 2004-5 में पहले एक बार अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें सभ्य,सुशील और सफल अधिवक्ता होने का गौरव प्राप्त है। उन्हें इस बार अध्यक्ष पद का स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था। उनके पक्ष में तमाम वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित कुछ स्थानीय प्रभावशाली राजनीतिक लोगों ने खुलकर लॉबिंग की थी। कुछ बाहरी शक्तियों ने आज सुबह मतदान से पहले आखिरी प्रयास के तहत बल्क में व्हाट्स एप संदेश भेजकर योगेन्द्र भाटी को जिताने की अपील की थी। इसके बावजूद मनोज भाटी ने विजय हासिल कर सभी लोगों को करारा जवाब दिया है। मनोज भाटी की इस चौंकाने वाली जीत के क्या कारण रहे और इसके भविष्य में क्या परिणाम होंगे? मनोज भाटी ने दरअसल अपने प्रतिद्वंद्वी योगेन्द्र भाटी को ही नहीं हराया है बल्कि उन सभी लोगों को हराया है जो बार एसोसिएशन से लेकर सभी चुनावों को अपनी उंगलियों के संकेतों से संचालित करने का दम्भ भरते हैं। इस चुनाव ने गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन में कतिपय वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बार पर वर्चस्व को समाप्त कर दिया है। इस चुनाव ने बार पर गुर्जर बिरादरी के एकाधिकार की भी हवा निकाल दी है। बेशक अध्यक्ष पद पर गुर्जर मनोज भाटी ने जीत हासिल की है परंतु उनकी जीत में चार सौ ब्राह्मण अधिवक्ताओं सहित गैर गुर्जर बिरादरियों ने महती भूमिका निभाई है।हालांकि यह चुनाव एक वर्ष के लिए होता है और नवनिर्वाचित पदाधिकारी आठ नौ महीने तक ही प्रभावशाली रहते हैं परंतु इस चुनाव के परिणाम आने वाले कई वर्षों तक प्रभाव डाल सकते हैं। निकट भविष्य में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कुछ जिला पंचायत सीटों पर बार एसोसिएशन चुनाव की कड़वाहट परिणामों में हेरफेर का कारण बन सकती है। बहरहाल चुनाव हार-जीत के परिणाम का नाम है।हार पीछे छूट गई गलतियों की समीक्षा करने का आग्रह करती है और जीत आगे होने वाली गलतियों से बचने का। सभी अधिवक्ताओं को मनोज भाटी की जीत मुबारक

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