औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के सुनियोजित विकास में सिरदर्द बनी जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर (भाग -2)

राजेश बैरागी।क्या जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर जनपद के उन गांवों में भी दखल रखती है,जिन गांवों से उसका प्रतिनिधित्व सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया है?तो फिर जिला पंचायत उन गांवों की भूमि पर मकान, दुकान,हाउसिंग सोसायटी या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के नक्शे कैसे स्वीकृत कर सकती है?ग्रेटर नोएडा के एक गांव चौगानपुर के एक ग्रामीण ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में एक याचिका दायर कर प्राधिकरण द्वारा उसके भवन को अवैध घोषित करने से रोकने की गुहार लगाई है। उसका दावा है कि उसने यह भवन जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर द्वारा स्वीकृत नक्शे के आधार पर बनाया है।चौगानपुर गांव भी उन गांवों में शामिल है जिनमें त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधत्व समाप्त कर दिया गया है।इन गांवों में सभी विकास कार्य और अनुरक्षण कार्य प्राधिकरण द्वारा कराए जाते हैं। जनपद की कुल 207 ग्राम पंचायतों में से केवल 82 ग्राम पंचायतों में ही ग्राम प्रधान, विकास खंड समिति सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव होते हैं।शेष 125 ग्राम पंचायत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित और अधिग्रहीत क्षेत्र में आती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक दशक पूर्व इन ग्राम पंचायतों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिया था। क्या चौगानपुर या प्रतिनिधत्व से बाहर किए गए अन्य गांवों में जिला पंचायत नक्शा पास कर सकती है? ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इसी बिंदु पर उच्च न्यायालय को जवाब देने की तैयारी कर रहा है

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