जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर बार चुनाव:बहती गंगा में किस किसने धोये हाथ

राजेश बैरागी।जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर बार एसोसिएशन के इस वर्ष होने वाले चुनाव का शोर आज मंगलवार शाम थम गया।कल 24 दिसंबर को मतदान होगा और प्रतिवर्ष होने वाले जिला न्यायालय बार एसोसिएशन के चुनाव अधिवक्ताओं के लिए अपने नुमाइंदे चुनने से अधिक लजीज व्यंजनों की दावतें उड़ाने और पसंद न आने वाले प्रत्याशी को पटकनी देने के रोमांच से भरे होते हैं। लगभग दो महीने पहले से संभावित प्रत्याशियों द्वारा चैंबर चैंबर मिठाई, कोल्डड्रिंक, समोसे पकोडों की आपूर्ति की जाने लगती है। इसके अलावा भी होटलों, रेस्तरांओं में अधिवक्ताओं के अलग-अलग समूहों को दावतें दी जाती हैं। चुनाव से लगभग एक सप्ताह पहले न्यायालय परिसर में अमूमन सभी प्रत्याशियों द्वारा भव्य पंडाल लगाकर विवाह आयोजनों से बढ़कर असीमित दावतें शुरू कर दी जाती हैं। जिला न्यायालय गौतमबुद्धनगर में कार्यरत अधिवक्ताओं की संख्या कमोबेश पांच हजार है। हालांकि इस वर्ष बार चुनाव में मतदान करने योग्य अधिवक्ताओं की संख्या 2935 ही है। परंतु दावतों पर सभी का हक है।जिसकी जैसी इच्छा,वैसी दावत। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हैं परंतु किसी को उसकी परवाह नहीं होती। अधिवक्ताओं की आजीविका की गारंटी, उनकी सुरक्षा और उनके कौशल विकास के लिए कोई कुछ नहीं करता। इसलिए चुनाव का सबसे बड़ा मेनीफेस्टो प्रत्याशियों द्वारा दी जाने वाली दावतें हैं। दावतों का एक हिस्सा शराब भी होता है। शराब पीने पर पुरुषों का एकाधिकार माना जाता है। महिला भी पीती हैं परंतु सामाजिक दृष्टि से यह स्वीकार्य नहीं है। चुनाव में भी यही सामाजिक सिद्धांत लागू रहता है। ऐसे में महिला अधिवक्ता द्वारा शराब की बोतल मांगना किसी को भी अचरज में डाल सकता है।ऐसा हुआ तो सवाल उठना लाजिमी था। पूछा गया,-क्या तुम पीती हो? उसने कहा,-नहीं,पति के लिए चाहिए।'(

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