औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के सुनियोजित विकास में 

 सिरदर्द बनी जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर

राजेश बैरागी।गौतमबुद्धनगर जिला पंचायत नोएडा ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अधिसूचित और अधिग्रहीत भूमि पर भी बड़े बड़े आवासीय तथा व्यवसायिक प्रोजेक्ट्स के नक्शे पास कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे अवैध नक्शों के आधार पर बिल्डर और भूमाफिया अब रेरा से भी पंजीकरण कराने की जुगत भिड़ा रहे हैं।
क्या जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर को नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिसूचित व अधिग्रहीत क्षेत्र में नक्शे पास करने का अधिकार है? दरअसल एक कथित आदेश की आड़ में जिला पंचायत तीनों औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में नक्शे पास करने की सेंधमारी कर रही है। यह आदेश गांवों के आबादी क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय तथा ग्रामीणों के आवास के नक्शे पास करने से संबंधित बताया जाता है। इस प्रकार के निर्माण के लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरण अपनी आधी अधूरी नीतियों के चलते न तो अनापत्ति जारी करते हैं और न मान्यता ही देते हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने तथा ग्रामीणों को मजबूत तथा सुविधाजनक आवास निर्माण के लिए राज्य सरकार द्वारा बीच का रास्ता निकाला गया था। जिला पंचायत गौतमबुद्धनगर द्वारा इसी आदेश की आड़ में प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में विशाल आवासीय कॉलोनी तथा व्यवसायिक भवनों के नक्शे धड़ल्ले से पास किए जा रहे हैं। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तो प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहीत भूमि पर भी जिला पंचायत द्वारा नक्शा पास किए जाने का मामला पिछले दिनों प्रकाश में आया था। दादरी जीटी रोड के साथ वाले गांवों में बड़े स्तर पर वेयरहाउस जिला पंचायत द्वारा पास नक्शों के आधार पर खड़े हो गए हैं। यह ग्रेटर नोएडा फेज दो का अधिसूचित तथा अधिग्रहीत क्षेत्र है। ग्रेटर नोएडा शहर के भीतर तो जिला पंचायत द्वारा आवासीय कॉलोनी, फ्लैट तथा विशाल व्यवसायिक परिसर तक के नक्शे पास किए गए हैं। जिला पंचायत से पास नक्शों के आधार पर कुछ अवैध बिल्डरों द्वारा रेरा से पंजीकरण हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे प्राधिकरणों का अपने क्षेत्रों में सुनियोजित विकास का दावा खोखला साबित हो रहा है। किंकर्तव्यविमूढ़ प्राधिकरण जिला पंचायत की घुसपैठ के समक्ष बोने और गूंगे साबित हो रहे हैं। भविष्य में जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत मानचित्रों के आधार पर बनने वाली अवैध कॉलोनियों और व्यवसायिक परिसरों के सीवरेज,जल, कूड़ा निस्तारण और भीड़ का भार भी प्राधिकरणों द्वारा विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ना निश्चित है। क्या जिला पंचायत नोएडा ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में इस प्रकार के नक्शे वास्तव में पास कर सकती है? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए अगली पोस्ट की प्रतीक्षा करें। जारी…….(

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