राजेश बैरागी।बरबस विश्व पटल पर नोएडा की पहचान स्थापित करा देने में सक्षम तथा पांच वर्ष पहले जन्म लेने के साथ दम तोड़ देने वाली अति महत्वाकांक्षी परियोजना नोएडा हेबिटेट तथा कंवेंशन सेंटर का अब कोई नाम लेने वाला भी नहीं बचा है। यह परियोजना दिल्ली एनसीआर समेत समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण थी।कभी लगभग सात सौ करोड़ रुपए के अपने खर्च से बनाने को तैयार नोएडा प्राधिकरण पीपीपी मॉडल पर बनवाने का निर्णय लेकर भी चुप्पी साधकर बैठ गया है।
यह अति महत्वाकांक्षी परियोजना सेक्टर 94 में एक विशाल हेबीटेट एवं कन्वेंशन सेंटर बनाए जाने की थी।इसके लिए वहां मिश्रित भू उपयोग वाले दो भूखंड संख्या 4 व 5 आज भी आरक्षित हैं। इन दोनों भूखंडों को मिलाकर लगभग 97000 वर्ग मीटर भूमि पर हेबिटेट क्लब तथा कंवेंशन सेंटर बनाया जाना प्रस्तावित है। यहां बनने वाले कंवेंशन सेंटर में 5 हजार,2 हजार तथा 5-5 सौ लोगों के बैठने की क्षमता वाले चार विशाल ऑडिटोरियम बनाए जाने हैं। इसके साथ ही एक मॉल,फूड कोर्ट, आर्ट गैलरी,ऑफिस तथा आवासीय फ्लैट भी बनाए जाने थे। यह पचास मंजिला अनूठा कंवेंशन एवं हेबिटेट सेंटर कई मायनों में दिल्ली के हेबिटेट सेंटर को भी पीछे छोड़ देता।प्राधिकरण ने इसके लिए 2019 में डिजाइन आदि भी बनवाकर स्वीकृत करा लिया था। इसके बाद इसके निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया।2020 में 443 करोड़ रुपए के सिविल निर्माण कार्य के टेंडर को उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा पांच प्रतिशत कम दर पर हासिल कर लिया गया। नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल -9 की देखरेख में काम शुरू भी हो गया।काम कुछ महीने चला भी परंतु मिट्टी चोरी, अपेक्षित गति से काम न होने तथा उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा टेंडर की शर्तों के विरुद्ध काम किसी अन्य ठेकेदार को हस्तांतरित करने के आरोपों के चलते नोएडा प्राधिकरण और निगम के बीच झगड़ा शुरू हो गया। प्राधिकरण ने नोटिस दिया, निगम ने जवाब दिया। निगम के जवाब से प्राधिकरण संतुष्ट नहीं हुआ। लिहाजा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती रितु माहेश्वरी ने निगम की जमा 26 करोड़ रुपए की सुरक्षा राशि जब्त करते हुए टेंडर निरस्त कर दिया। निगम तब तक 6-7 करोड़ रुपए का काम करा भी चुका था। निर्माण पर खर्च हुई धनराशि तथा जब्त की गई सुरक्षा राशि को लेकर आज भी प्राधिकरण तथा निगम के बीच मध्यस्थता अदालत में मामला चल रहा है। उधर 2021 में प्राधिकरण ने अपने बोर्ड से इस हेबिटेट तथा कंवेंशन सेंटर को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर बनवाने का प्रस्ताव पास करा लिया। जुलाई 2023 तक यहां नियुक्त रहीं तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीमती रितु माहेश्वरी तथा उनके उत्तराधिकारी वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ लोकेश एम ने फिर कभी इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना की ओर मुड़कर नहीं देखा। प्राधिकरण की फिजाओं में तैरती चर्चाओं में सुना जाता है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना दोनों सरकारी संस्थानों क्रमशः नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन उच्च अधिकारियों के निजी स्वार्थों की भेंट चढ़ गई। यदि यह परियोजना साकार रूप ले लेती तो नोएडा में एक विश्वस्तरीय व्यवस्था हो जाती जहां देश विदेश के राजनीतिक तथा व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडलों की बैठकों तथा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार जैसे आयोजन होते। दरअसल ऐसी बड़ी परियोजनाएं अधिकारियों की बड़ी सोच और समर्पण से साकार होती हैं। दुर्भाग्य से ऐसे अधिकारियों की संख्या बहुत नहीं रह गई है।
फिर कब शुरू होगी नोएडा में बनने से पहले ही दम तोड़ गई हेबिटेट तथा कंवेंशन सेंटर की अति महत्वाकांक्षी परियोजना?









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