मंदिर बनाम मस्जिद:कृष्ण जन्मभूमि में लाइट एंड साउंड शो

राजेश बैरागी-
मंदिर की प्राचीरों पर ब्रज की पौराणिक कृष्ण लीलाओं को तकनीकी के माध्यम से प्रस्तुत होते देखना कैसा अनुभव है? कभी दुष्ट और क्रूर शासक कंस ने मथुरा जैसी आध्यात्मिक धरती पर शासन किया था। उसके अंत के लगभग साढ़े चार हजार बरस बाद एक ऐसे ही शासक ने लगभग समूचे हिन्दुस्तान पर राज किया। उसने भारत की सनातन संस्कृति के प्रतीकों और साक्ष्यों को नष्ट भ्रष्ट करने में रुचि प्रकट की और सत्ता की ऊर्जा का दुरुपयोग कर ऐतिहासिक घावों की रचना की।इस गुरुवार की देर शाम मैं अपने दो पत्रकार साथियों क्रमशः आशुतोष भटनागर और डॉ देवेंद्र कुमार शर्मा के साथ कृष्ण जन्मभूमि परिसर में लाइट एंड साउंड शो देखने के लिए उपस्थित था। मां यमुना के मुख से ब्रज क्षेत्र की पौराणिक से अद्यतन कहानी कहने के लिए प्रतिदिन चलाए जाने वाले इस लाइट एंड साउंड शो में अत्याचारी शासक कंस की क्रूरता और उसके नाश का प्रदर्शन किया जाता है। इस शो के दौरान एक दृश्य में मां यमुना एक समय कालिया नाग की गलत हरकतों से स्वयं के दूषित होने का उल्लेख करती हैं। इस शो से पहले हम गोकुल गये। वहां बैराज से आगे बह रही यमुना में गति तो थी परंतु उसके जल में रासायनिक झाग उठ रहे थे। एक जिम्मेदार व्यक्ति ने बताया कि मथुरा की ढेर गंदगी प्रतिदिन यमुना के आंचल में धकेल दी जाती है और एक अबला नारी की भांति यमुना उस गंदगी को अपनी छाती पर रखकर आगे बढ़ जाती है। कृष्ण ने यमुना को कालिया नाग के उत्पातों से मुक्ति दिलाई थी परंतु उनके जन्मस्थान को कई सौ बरस बाद भी एक अधम शासक द्वारा किए गए अवैध कब्जे से मुक्ति नहीं मिल पाई है। अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। झूठे सच्चे तर्क दिए जा रहे हैं। फैसला कब होगा कोई नहीं बता सकता है।लाइट एंड साउंड शो पौन घंटे चलता है। यह कृष्ण जन्मभूमि मंदिर की विशाल प्राचीरों पर प्रदर्शित किया जाता है। मैं देख रहा था कि पूरे समय जन्मभूमि परिसर में उत्सव का माहौल था।बराबर में खड़ी मस्जिद की तीनों मीनारें रौशन तो थीं परंतु उनपर कोई जीवंतता नहीं थी।

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