श्रीमती निर्वाचन अधिकारी? को पत्र लिखकर एस आई आर कार्य में लगी शिक्षिका द्वारा नौकरी छोड़ने की घोषणा

राजेश बैरागी।क्या मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लगे शिक्षक आदि कर्मचारी इस कार्य को करने की अपेक्षा नौकरी से त्यागपत्र दे सकते हैं? नोएडा के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका ने ऐसा ही कदम उठाते हुए एस आई आर से संबंधित सामग्री सौंपने की अनुमति मांगी है। हालांकि इस संबंध में उसके द्वारा लिखे गए पत्र को पढ़कर यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि हमारे बच्चों की शैक्षणिक जिम्मेदारी कैसे लोगों के हाथों में है।
गेझा (नोएडा) के उच्च प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र देने की पेशकश की है।यह शिक्षिका वर्तमान में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण कार्य में लगी हुई है।इसे क्षेत्र के लगभग बारह सौ मतदाताओं से एस आई आर फॉर्म भरवाकर जमा कराने हैं।यह दो सौ से अधिक फॉर्म ऑनलाइन जमा भी करा चुकी है। यह जानकारी उसने स्वयं उस पत्र में दी है जिसमें उसने आगे यह और शिक्षण कार्य करने में असमर्थता जताते हुए नौकरी छोड़ने की घोषणा की है। हालांकि इस शिक्षिका ने फोन उठाने के बावजूद नेक दृष्टि से इस संबंध में बात करने से इंकार कर दिया। इस समूचे प्रकरण में महत्वपूर्ण वह पत्र है जिसमें उक्त शिक्षिका द्वारा एस आई आर का कार्य करने में असमर्थता जताते हुए नौकरी से त्यागपत्र देने की बात कही है। यह पत्र श्रीमती निर्वाचन अधिकारी को संबोधित है। क्या इस पदनाम से कोई अधिकारी होता है? यदि वास्तव में यह पत्र उस शिक्षिका द्वारा ही लिखा गया है तो एक शिक्षक की समझ और पढ़ने लिखने की उसकी क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगना तो अनिवार्य है। यदि उसने यह पत्र जिला निर्वाचन अधिकारी को संबोधित किया है तो उस पद पर अवश्य ही महिला अधिकारी नियुक्त है परंतु उसे श्रीमती निर्वाचन अधिकारी कहकर संबोधित नहीं किया जा सकता है। मुझे लगता है कि उक्त शिक्षिका के इस पत्र पर संज्ञान लेने से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता की जांच की जानी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार के साथ साथ अयोग्य और काम से भागने वाले लोगों के कारण भी चौपट हो रही है

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