नोएडा सेक्टर 18 कृष्णा अपरा प्लाजा: एक व्यवसायिक स्लम आग लगने के लिए अभिशप्त, सुरक्षा के उपाय रामभरोसे

राजेश बैरागी।नोएडा प्राधिकरण के एकमात्र व्यवसायिक सेक्टर 18 में व्यवसायिक स्लम बन चुके कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में आग लगने जैसी घटनाओं से सुरक्षा के क्या उपाय हैं?गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दायर एक याचिका के द्वारा सेक्टर 18 स्थित कृष्णा अपरा प्लाजा में सात महीने पहले हुई आग लगने की एक घटना को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उस घटना को लेकर न तो नोएडा प्राधिकरण और न कमिश्नरेट पुलिस ही कोई कार्रवाई करने को तैयार है।
नोएडा के एकमात्र विशुद्ध व्यवसायिक सेक्टर 18 स्थित कृष्णा अपरा प्लाजा कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में आज तड़के एक बार फिर आग लग गई। कॉम्प्लेक्स बंद होने के कारण आज कोई जनहानि तो नहीं हुई परंतु अब से लगभग सात महीने पहले इसी कॉम्प्लेक्स में आग लगने की घटना के दौरान यहां फंसी एक महिला पूजा गुप्ता की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी।ढाई वर्ष की एक बच्ची की मां पूजा गुप्ता की उस घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी। मृतका के पति सेक्टर 122 निवासी मार्तण्ड गुप्ता ने 1अप्रैल 2025 को हुई उस घटना की जांच के लिए गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) (पहले यह आईपीसी की धारा 156(3) थी) के तहत एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई है। पूजा गुप्ता यहां आनंद सोल्यूशन्स नामक कंपनी की शाखा में बतौर कार्यालय सहायक कार्य करती थी।आग लगने पर उसने और सात अन्य लोगों ने जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। सभी को गंभीर चोटें आई थीं परंतु अठारह दिन जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद पूजा गुप्ता की मौत हो गई थी।उल्लेखनीय है कि सेक्टर 18 के 750 वर्गमीटर के पी-3 भूखंड पर यह कृष्णा अपरा प्लाजा कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना है। इस भूखंड का आवंटन मैसर्स जयकृष्ण एस्टेट प्राईवेट लिमिटेड के पक्ष में 21जनवरी 2000 को किया गया था।5 सितंबर 2000 को उक्त भूखंड पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने हेतु नक्शा स्वीकृत किया गया जबकि 1 अगस्त 2002 को अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किया गया। प्राधिकरण का दावा है कि उसने सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेकर ही अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किया था। उसके बाद? इस कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में इस वर्ष में सात महीने के अंतर से दो बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस सेक्टर में बने दूसरे कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्सों का भी यही हाल है।इन सभी में मोटे किराए के लालच में क्षमता से अधिक ऑफिस और दुकानें खोल दी गई हैं। यह एक प्रकार से व्यवसायिक स्लम हैं जहां भीड़ है, कारोबार है, रोजगार भी है परंतु आपदाओं से बचाव का न कोई उपाय है और न कोई जिम्मेदार ही है।इन कॉम्प्लेक्सों में प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है। पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्राधिकरण इन कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्सों की सुरक्षा को लेकर ऐसे ही बेफिक्र है जैसे शहर की झुग्गी-बस्तियों की सुरक्षा को लेकर

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